कृपया ध्यानपूर्वक पढ़ें — सच भले असहज हो, नज़रअंदाज़ न करें
यह वह सच्चाई है जिसे लिखने में अक्सर कलम काँपती है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी OBC समाज से आते हैं, लेकिन देश ने उन्हें कभी जाति की पहचान में नहीं बाँधा।सर्व समाज—विशेषकर सामान्य वर्ग—ने उन्हें “हिंदू एकता के प्रतीक” के रूप में स्वीकार किया और तन-मन-धन से समर्थन दिया।प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी सरकार ने OBC समाज के लिए कई बड़े और ऐतिहासिक फैसले लिए:OBC आयोग को संवैधानिक दर्जा दिया — लेकिन सामान्य वर्ग के लिए कोई अलग आयोग नहीं बना।फिर भी सामान्य वर्ग ने कोई विरोध नहीं किया।NEET (AIQ) में OBC को 27% आरक्षण दिया गया — सामान्य वर्ग ने इसे भी स्वीकार किया।105वाँ संविधान संशोधन लाकर राज्यों को OBC सूची और आरक्षण तय करने का अधिकार दिया गया।यहाँ भी सामान्य वर्ग मौन रहा।OBC छात्रों के लिए पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप बढ़ाई गई, जिससे मेडिकल, इंजीनियरिंग, IIT-IIM में पढ़ने वाले छात्रों को लाभ मिला।जबकि सामान्य वर्ग के गरीब छात्रों के लिए आज भी समान स्तर की सुविधा नहीं है।UPSC, SSC, NEET, JEE जैसी परीक्षाओं के लिए OBC छात्रों हेतु फ्री/सब्सिडी कोचिंग योजनाएँ शुरू की गईं।तब भी सामान्य वर्ग ने कोई विरोध नहीं किया।इसके बावजूद आज UGC के नए नियमों के माध्यम से ऐसे निर्णय सामने आ रहे हैं,जिनका सीधा असर सामान्य वर्ग के छात्रों पर पड़ सकता है।...
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